IND vs NZ 3rd ODI: कोहली की जंग बेकार, इन खिलाड़ियों की नाकामी से भारत हारा निर्णायक मुकाबला

IND vs NZ 3rd ODI: कोहली की जंग बेकार, इन खिलाड़ियों की नाकामी से भारत हारा निर्णायक मुकाबला

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच खेले गए तीसरे और निर्णायक वनडे मुकाबले में टीम इंडिया को 41 रनों से करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ ही भारत ने तीन मैचों की वनडे सीरीज़ 2–1 से गंवा दी, जबकि न्यूज़ीलैंड ने भारतीय धरती पर इतिहास रच दिया।

मैच में एक तरफ विराट कोहली की शतकीय पारी ने उम्मीद जगाई, तो दूसरी तरफ कुछ भारतीय खिलाड़ियों का बेहद निराशाजनक प्रदर्शन टीम इंडिया पर भारी पड़ गया। न्यूज़ चैनल की भाषा में कहें तो—ये वही खिलाड़ी रहे जो इस मैच में भारत की हार के विलेन साबित हुए।


डेथ ओवर्स में गेंदबाज़ी ने डुबोई लुटिया

भारतीय गेंदबाज़ी की सबसे बड़ी कमजोरी सामने आई डेथ ओवर्स में
मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा आखिरी ओवरों में पूरी तरह बिखरते नजर आए।

  • न यॉर्कर सफल रही
  • न ही रन रोकने की कोई रणनीति दिखी
  • डेरिल मिचेल और ग्लेन फिलिप्स ने खुलकर रन बटोरे

नतीजा यह हुआ कि न्यूज़ीलैंड का स्कोर 337 रन तक पहुंच गया, जो भारत के लिए पहाड़ जैसा साबित हुआ।


श्रेयस अय्यर और केएल राहुल फिर हुए फेल

बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत को मिडिल ऑर्डर से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन
श्रेयस अय्यर और केएल राहुल एक बार फिर दबाव में टूटते नजर आए।

  • श्रेयस अय्यर गैर-ज़रूरी आक्रामक शॉट खेलकर आउट हुए
  • केएल राहुल शुरुआत को बड़ी पारी में नहीं बदल सके

न्यूज़ चैनल की जुबान में—
“जब टीम को सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी, तब मिडिल ऑर्डर ने साथ छोड़ दिया।”


हार्दिक पांड्या का ऑलराउंड फेल्योर

स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या से मैच जिताऊ प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन वह न गेंद से असर दिखा पाए और न ही बल्ले से।

  • गेंदबाज़ी में रन लुटाए
  • बल्लेबाज़ी में कोई बड़ी हिट नहीं
  • दबाव के पल में टीम को संभाल नहीं पाए

उनका फीका प्रदर्शन भारत के लिए एक और बड़ा झटका साबित हुआ।


फील्डिंग में चूक, मौके हाथ से निकले

मैच में भारत की फील्डिंग भी सवालों के घेरे में रही
शुभमन गिल समेत कई खिलाड़ियों से अहम मौकों पर गलतियां हुईं।

  • आसान कैच छोड़े गए
  • ग्राउंड फील्डिंग सुस्त रही
  • अतिरिक्त रन दिए गए

क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि यही छोटे मौके मैच का रुख बदल देते हैं।


कोहली अकेले लड़ते रहे

इस पूरे मुकाबले में अगर किसी खिलाड़ी ने भारत का झंडा ऊंचा रखा, तो वो थे
विराट कोहली

  • 124 रनों की शानदार पारी
  • दबाव में संयम
  • आखिरी दम तक संघर्ष

लेकिन क्रिकेट टीम गेम है, और कोहली को दूसरे छोर से वह समर्थन नहीं मिला जिसकी जरूरत थी।


न्यूज़ीलैंड की रणनीति रही भारत से बेहतर

जहां भारतीय टीम दबाव में बिखरती नजर आई, वहीं न्यूज़ीलैंड ने पूरे मैच में
बेहतर प्लानिंग, धैर्य और आत्मविश्वास दिखाया।

  • सही समय पर गेंदबाज़ी बदलाव
  • सेट बल्लेबाज़ों ने जिम्मेदारी निभाई
  • दबाव में शांत फैसले

यही कारण रहा कि न्यूज़ीलैंड भारत में इतिहास रचने में कामयाब रहा।


निष्कर्ष

तीसरे वनडे में भारत की हार किसी एक खिलाड़ी की वजह से नहीं, बल्कि
डेथ बॉलिंग की विफलता, मिडिल ऑर्डर की नाकामी, हार्दिक पांड्या का फीका प्रदर्शन और फील्डिंग की चूक का नतीजा रही।

न्यूज़ चैनल की क्लोज़िंग लाइन में कहें तो—
“कोहली लड़े अकेले, टीम इंडिया सामूहिक तौर पर हार गई।”

अब सवाल यह है कि क्या टीम इंडिया इस हार से सबक लेकर आगे सुधार करेगी, या बड़े मुकाबलों में यही कहानी दोहराई जाएगी?

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