


बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के एग्ज़िट पोल के नतीजे जारी हो चुके हैं और एक बार फिर राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है। अधिकतर सर्वेक्षणों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाला महागठबंधन (MGB) पिछड़ता नज़र आ रहा है।
जहाँ एनडीए को 130 से 160 सीटों के बीच जीत मिलने का अनुमान जताया गया है, वहीं महागठबंधन को 70 से 100 सीटों के बीच सीमित बताया जा रहा है। कुछ एग्ज़िट पोल्स ने यह भी दावा किया है कि मुकाबला कड़ा है, लेकिन सत्ता का पलड़ा अब भी एनडीए की ओर झुकता दिख रहा है।
🔹 EXIT POLL का बड़ा संकेत: नीतीश और मोदी फैक्टर काम आया
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भी नीतीश कुमार की साख, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा और बीजेपी की मजबूत चुनावी मशीनरी एनडीए को फायदा पहुंचा रही है। वहीं, महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव युवाओं और बेरोज़गारी के मुद्दे को ज़ोर-शोर से उठाने के बावजूद ग्रामीण इलाकों में अपेक्षित लहर नहीं बना पाए।
बिहार में इस बार तीन चरणों में मतदान हुआ और लगभग 58 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मतदान के बाद से ही यह सवाल बना हुआ था कि क्या नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बनेंगे, या इस बार तेजस्वी यादव सत्ता में वापसी करेंगे।
🔹 सीटों का अनुमान: NDA आगे, महागठबंधन पीछे
अलग-अलग एजेंसियों के एग्ज़िट पोल्स के अनुसार:
- एबीपी–सी वोटर सर्वे ने एनडीए को 137-153 सीटें, जबकि महागठबंधन को 83-97 सीटें मिलने का अनुमान जताया है।
- टाइम्स नाउ–एटलक सर्वे में एनडीए को 125-145 सीटें, महागठबंधन को 90-110 सीटें दी गई हैं।
- एएक्सिस माय इंडिया के सर्वे में मुकाबला कुछ हद तक नज़दीकी बताया गया है — एनडीए को 121-141 सीटें, जबकि महागठबंधन को 98-118 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है।
अगर इन अनुमानों को औसतन देखा जाए तो एनडीए बहुमत के आसपास या उससे ऊपर पहुँचता दिख रहा है।
🔹 वोट शेयर के अनुमान
वोट प्रतिशत के मामले में भी एनडीए आगे दिख रहा है। एग्ज़िट पोल्स के अनुसार,
- एनडीए को लगभग 43 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है,
- जबकि महागठबंधन को करीब 41 प्रतिशत वोट शेयर मिल सकता है।
बाकी वोट छोटे दलों और निर्दलीयों के हिस्से में जाने की संभावना है।
🔹 महागठबंधन की रणनीति पर सवाल
महागठबंधन ने इस चुनाव में बेरोज़गारी, महंगाई और भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बनाया था। तेजस्वी यादव ने अपनी सभाओं में “नौकरी, शिक्षा और सम्मान” का नारा दिया, लेकिन परिणामों से पहले ही एग्ज़िट पोल यह संकेत दे रहे हैं कि जनता अब भी स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महागठबंधन के अंदर सीट बंटवारे और उम्मीदवार चयन को लेकर असंतोष भी रहा, जिसका असर नतीजों पर पड़ सकता है। वहीं, नीतीश कुमार की “अनुभवी प्रशासक” वाली छवि ग्रामीण मतदाताओं में अब भी प्रभावी है।
🔹 जन सुराज पार्टी और अन्य दलों का प्रदर्शन
पूर्व रणनीतिकार प्रशांत किशोर की नई पार्टी जन सुराज पार्टी (JSP) को लेकर भी कयास लगाए जा रहे थे कि वह कुछ सीटों पर खेल बिगाड़ सकती है, लेकिन ज़्यादातर एग्ज़िट पोल्स में JSP को 0 से 5 सीटों तक ही सीमित दिखाया गया है।
एलजेपी (रामविलास) और अन्य छोटे दलों का प्रभाव इस बार बहुत सीमित रहने की संभावना जताई जा रही है।
🔹 जनता की राय: “स्थिर सरकार चाहिए”
पटना और आसपास के इलाकों में मतदाताओं से बात करने पर एक बात साफ़ निकलकर आई — लोग अब विकास और स्थिरता को प्राथमिकता दे रहे हैं। युवाओं में बेरोज़गारी को लेकर नाराज़गी ज़रूर दिखी, लेकिन एनडीए के वोट बैंक में कोई बड़ी सेंध लगती नहीं दिख रही।
एक युवा मतदाता ने कहा, “हम चाहते हैं कि बिहार में काम और निवेश आए। राजनीतिक अस्थिरता से नुकसान होता है। अगर नीतीश जी और मोदी जी साथ में हैं तो भरोसा है कि कुछ बदलाव आएगा।”
⚠️ अभी सिर्फ़ EXIT POLL, असली नतीजे 14 नवंबर को
यह ध्यान देना बेहद ज़रूरी है कि एग्ज़िट पोल सिर्फ़ मतदान के बाद का आकलन है, न कि अंतिम परिणाम। बिहार में मतगणना 14 नवंबर 2025 (गुरुवार) को होगी और तभी यह तय होगा कि कौन बनेगा बिहार का अगला मुख्यमंत्री।
फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा गर्म है — क्या नीतीश कुमार एक बार फिर सत्ता में वापसी करेंगे, या तेजस्वी यादव कोई चमत्कार दिखाएंगे?
🏁 निष्कर्ष
एग्ज़िट पोल्स के अनुसार, इस बार बिहार की जनता ने स्थिरता और अनुभव को प्राथमिकता दी है। एनडीए को स्पष्ट बढ़त के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन बिहार की राजनीति में अंतिम फैसला हमेशा आखिरी क्षण तक रोचक रहता है।
अब सबकी निगाहें 14 नवंबर की सुबह पर टिकी हैं — जब मतगणना के साथ यह साफ़ होगा कि क्या नीतीश कुमार का “सुशासन” फिर लौटेगा, या महागठबंधन नई कहानी लिखेगा।
